महाकुंभ भगदड़: सहायता अभिशाप न बन जायेमहाकुंभ भगदड़: मस्जिद के अंदर आराम कर रहे श्रद्धालू
  • महाकुंभ भगदड़ में मुस्लिमों ने दिखाया बड़ा दिल
  • जिस मस्जिद में आज शरण लिया कल उसी मस्जिद पे मंदिर होने का दावा भी किया जा सकता है
  • सोशल मिडिया में चर्चाएँ तेज़

प्रयागराज : महाकुंभ भगदड़ में अब तक 25 से 30 श्रद्धालुओं के जान जाने की पुष्टि की जा चुकी है. एक दूसरी घटना में भी 4-5 श्रद्धालुओं के मरने की भी खबर है. घटना में मारे गए श्रद्धालुओं के आंकड़ों में मतभेद है. एक दूसरी रिपोर्ट के अनुसार महाकुंभ भगदड़ के बाद 1500 लोग लापता बताये जा रहे हैं. जिनकी कोई जानकारी सरकार के पास भी नहीं है. सरकार इस पूरे घटना क्रम की जाँच कर रही है. महाकुंभ भगदड़ में मृतक श्रद्धालुओं के परिवार को 25-25 लाख का सहायता राशि देने का एलान किया है.


महाकुंभ भगदड़: मुस्लिमों ने दी शरण

महाकुंभ में 28 जनवरी की देर रात श्रद्धालु मौनी अमावस्या के अमृत स्नान के लिए पहुंचने लगे। संगम नोज से पहले बैरिकेडिंग लगी थी। रास्ता ब्लॉक था। भीड़ पीछे से आती चली गई। करीब आधा किलोमीटर का रास्ता जाम हो गया। जिसके कारण काफी परीशानी उत्पन्न हो गई. तभी स्थानीय मुस्लिमों ने श्रद्धालुओं को हर संभव मदद पहुंचाई. खाने पीने से लेकर दवा आदि, श्रद्धालुओं की सभी जरूरतों का ध्यान रखा. रात गुजारने के लिए मस्जिद , इमाम बाड़े, एंव मजारों के दरवाज़े खोल दिये. जिस की मीडिया में बड़ी सराहना हो रही है.


This image has an empty alt attribute; its file name is ef408686-aff9-45b7-8f10-8a4c25c60654-1024x576.jpg
महाकुंभ भगदड़: एक मदरसे के अन्दर आराम से सो रहे श्रद्धालु

सहायता अभिशाप न बन जाये:

महाकुंभ के शुरुआत में मुस्लिमों के बायकाट का पुरजोर सपोर्ट किया गया था. प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने मुस्लिमों के खिलाफ जम कर उत्पाद मचाया. अब उन्हीं मुस्लिमों ने महाकुंभ श्रद्धालुओं को शरण दी. इस दौरान मुस्लिमों में एक नई शंका उत्पन्न हो रही है. जिस की सोशल मिडिया में चिंताएं जताई जा रही हैं.

मुस्लिम समुदाय में इस बात की चिंताएं बढ़ रही हैं कि हर मस्जिद में मंदिर तलाश करने वाला बहु संख्यक समुदाय, क्या मुस्लिमों की इस दरिया दिली को याद रख पायेगा?. इस बात की क्या जमानत है कि कल यही समाज शरण लेने वाली मज्सिदों, मजारो और इमामबाड़ों पे किसी मंदिर होने का दावा नहीं ठोंकेगा?.

मुस्लिम समुदाय कि चिंताओं को निराधार नहीं कहा जा सकता. विगत वर्षों में जिस तरह मस्जिदों में मंदिरों की तलाश की जा रही. उसको देखते हुये इन आशंकाओं से इनकार नहीं किया जा सकता. ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा ईदगाह, अजमेर दरगाह एवं संभल जामा मस्जिद की घटनाएँ इसका उदहारण हैं


मुस्लिमों की मजबूरी:

हजारों बार प्रताड़ित किये जाने के बाद भी बहुसंख्यक के साथ अच्छा व्यवहार करना मुस्लिमों का धार्मिक कर्म है. इस्लाम में अपने दुश्मनों के साथ भी दुर्व्यवहार करने कि इजाज़त नहीं है. इस लिए मुस्लिम समुदाय किसी दुर्व्यवहार के बजाये अच्छा सलूक करने पे मजबूर होता है. अब यह बहुसंख्यक समाज की ज़िम्मेदारी है कि मस्जिदों में मंदिरों कि तलाश पर विराम लगाए, अन्यथा इस देश में गृहयुद्ध की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.

0 thoughts on “महाकुंभ भगदड़: सहायता अभिशाप न बन जाये”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *