इमामबारगाह हादी बेगम साहिबा में मजलिस-ए-ख़म्मसा की दूसरी मजलिस असरअंदाज़ अंदाज़ में अंजाम
मौलाना हैदर मौलाई साहब ने बयान में जनाबे फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) के दुखद वाक़े का ज़िक्र किया, मोमिनीन की बड़ी तादाद ने शिरकत की

कानपुर। मोहम्मद उस्मान कुरैशी।
इमामबारगाह हादी बेगम साहिबा, कर्नलगंज में जारी मजलिस-ए-ख़म्मसा की दूसरी मजलिस का एहतमाम शनिवार को बेहद असरअंदाज़ अंदाज़ में हुआ। इस मौके पर मजलिस को मौलाना हैदर मौलाई साहब (लखनऊ) ने ख़िताब फरमाया।

अपने बयान में मौलाना साहब ने फ़रमाया कि दुश्मनों ने जनाबे फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) के दरवाज़े पर लकड़ियाँ जमा कीं और उसमें आग लगा दी। दरवाज़ा जलकर सैय्यदा (स.अ.) पर गिर पड़ा जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। उन्हीं चोटों के बाद वे सिर्फ़ पचहत्तर (75) दिन ज़िंदा रहीं और शहीदा-ए-बाबे रिसालत बन गईं।

इसी दुखद वाक़े की याद में यह मजलिस इमामबारगाह हादी बेगम साहिबा में मुनअक़िद की गई, जिसमें मोमिनीन की बड़ी तादाद ने शिरकत कर रसूल की बेटी पर ग़म मनाया

मजलिस की निज़ामत जनाब इंतिख़ाब आलम काज़मी मौलाई साहब ने अंजाम दी।
पेशख़्वानी जनाब तालीब हुसैनी साहब, डॉ. ज़ुल्फ़िकार अली रिजवी साहब, यावर कानपुरी साहब और फुरक़ान कानपुरी साहब ने की।

मजलिस के बाद अंजुमन जाफ़रिया और अंजुमन मुईनुल मोमिनीन ने अपने पुरमज़मून नौहे और कलाम पेश किए, जिससे पूरा माहौल ग़म-ए-रसूल की बेटी (स.अ.) से गूंज उठा।

साथ ही हुसैन टेकरी (मध्य प्रदेश) की ज़ियारत के लिए कुरआन-ए-राज़ी के ज़रिए पाँच मोमिनीन का कुरा खोला गया, जिन्हें
मौलाना जहीर अब्बास साहब, मौलाना तसव्वुर साहब, मौलाना इंतिख़ाब आलम साहब, कंबर रिज़वी, शाहाब मज़हर और डॉ. ज़ुल्फ़िकार अली रिजवी साहब ने दिली मुबारकबाद पेश की।