उर्दू और हिंदी एक ही चेहरे की दो आँखें हैं : डॉ. अम्मार रिज़वी
उर्दू और हिंदी एक ही चेहरे की दो आँखें हैं, उर्दू को किसी आंदोलन की आवश्यकता नहीं है। आंदोलनों से भाषाएँ नहीं, बल्कि सोच ज़िंदा रहती है।
उर्दू और हिंदी एक ही चेहरे की दो आँखें हैं, उर्दू को किसी आंदोलन की आवश्यकता नहीं है। आंदोलनों से भाषाएँ नहीं, बल्कि सोच ज़िंदा रहती है।