मस्जिद सूटरगंज में हुई विलायत-ए-इमाम हसन असकरी की शानदार महफ़िल
उन्होंने यह भी कहा कि हर इंसान को रोज़ाना अपनी ज़िंदगी का हिसाब करना चाहिए—क्या आज मेरी वजह से किसी को तकलीफ़ पहुँची? क्या मैंने किसी की मदद की? और…
उन्होंने यह भी कहा कि हर इंसान को रोज़ाना अपनी ज़िंदगी का हिसाब करना चाहिए—क्या आज मेरी वजह से किसी को तकलीफ़ पहुँची? क्या मैंने किसी की मदद की? और…