रविन्द्र श्रीवास्तव जुगानी भाई को विनम्र श्रद्धांजलि
तुम आके लौट गये फिर भी हो यहीं मौजूद, तुम्हारे जिस्म की खुश्बू मेरे मकान में है' : मुर्तजा हुसैन रहमानी
तुम आके लौट गये फिर भी हो यहीं मौजूद, तुम्हारे जिस्म की खुश्बू मेरे मकान में है' : मुर्तजा हुसैन रहमानी