इमाम हुसैन और कर्बला की याद में शब्बेदारी का 55वा दौर संपन्न
कानपुर। मोहम्मद उस्मान कुरैशी।आज अंजुमन फिरदौसिया की पहली मजलिस शुरू हुई इसमें सबसे पहले शायरों ने अपने कलाम इमाम हुसैन की बारगाह में पेश किया
कानपुर। मोहम्मद उस्मान कुरैशी।आज अंजुमन फिरदौसिया की पहली मजलिस शुरू हुई इसमें सबसे पहले शायरों ने अपने कलाम इमाम हुसैन की बारगाह में पेश किया
छठवीं मुहर्रम: इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद, इमाम हुसैन कल भी जिंदा थे, आज भी जिंदा हैं और सुबह कयामत तक जिंदा रहेंगे
महिलाओं की महफिल में गूंजी या हुसैन की सदा, इमाम हुसैन कल भी जिंदा थे, आज भी जिंदा हैं और क़यामत तक जिंदा रहेंगे