RBI MPC: ब्याज दरों की कटौतीRBI MPC: ब्याज दरों की कटौती, महंगाई पर कंट्रोल पाने की कोशिश

भारत सरकार ने मार्च में समाप्त होने वाले वर्ष में 6.4% की वार्षिक वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो चार वर्षों में इसकी सबसे धीमी गति है तथा कमजोर विनिर्माण क्षेत्र और धीमी कॉर्पोरेट निवेश के कारण इसके प्रारंभिक अनुमान के निचले स्तर से भी कम है।

मुंबई: RBI MPC भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद रिजर्व बैंक के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मॉनेटरी पॉलिसी की घोषणा की। विशेषज्ञों के अनुमान सोरूप इस बार रेपो रेट में  25 आधार अंकों की कटौती कर 6.25 प्रतिशत कर दिया गया है। एमपीसी के सभी सदस्य रेपो रेट कटौती के पक्ष में रहे।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एमपीसी की बैठक उपरांत एलान किया कि रेपो में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है। इसे 6.5% से घटाकर 6.25% कर दिया गया है। संजय मल्होत्रा ने बताया कि एमपीसी के सभी सदस्य दर कटौती के पक्ष में हैं।

आरबीआई गवर्नर के अनुसार महंगाई दर लक्ष्य के करीब है। इसका इकोनॉमी पर अच्छा असर है। आरबीआई गवर्नर तीन दिवसीय बैठक के बाद ब्याज दरों पर फैसले का एलान किया। उन्होंने कहा कि हम रेगुलेशन को संतुलित बनाए रखने का निरंतर परियास कर रहे हैं। आरबीआई गवर्नर ने महंगाई लक्ष्य से जुड़े फ्रेमवर्क में बदलाव के भी संकेत दिया है। नए नियमों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। उन्होंने ने कहा कि सबंधित पक्षों से रेगुलेशन पर बातचीत जारी है।

7 फरवरी 2025 की मौद्रिक नीति समिति (RBI MPC) की बैठक के बाद रिजर्व बैंक गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मॉनेटरी पॉलिसी की घोषणा की। विशेषज्ञों को उम्मीद थी कि इस बार रेपो रेट में  25 आधार अंकों कटौती कर 6.25 प्रतिशत किया जा सकता है।

फरवरी 2023 से रेपो रेट 6.5 % है। 2020 में कोविड महामारी के दौरान ब्याज दरों में कटौती की गई थी, लेकिन इसके बाद धीरे धीरे कर ब्याज दरों को दोबारा 6.5 प्रतिशत बढ़ा दिया गया। रेपो रेट कटौती की घोषणा लंबे समय के बाद हुई है। इससे आम आदमी को होम लोन, वाहन, पसर्नल लोन की ईएमआई में राहत मिलेगी। सस्ते कर्ज से लोगों पर से ईएमआई का बोझ कम होगा।

फिल्हाल रेपो रेट में यह कटौती कितना प्रभावी होगी अभी कुछ कहा नहीं जा सकता यह सही है रेपो रेट में कटौती से थोड़ी रहत तो मिलगी किन्तु रोज़मर्रा की दूसरी चीज़ों में बढ़ रही महंगाई के कारण इस से ज्यादा रहत मिलने कि आशा नहीं कि जा सकती।

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