संकल्प स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों ने सीखा योग और स्वस्थ जीवन का महत्व, रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मनाया गया दिन

कानपुर।मोहम्मद उस्मान कुरैशी। भारतीय बाल रोग अकादमी (IAP) द्वारा रविवार, 26 अगस्त को “IAP चैरिटी डे” का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम “Giving Every Child a Healthier Tomorrow” और स्लोगन “Serve. Support. Strengthen” के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मदर टेरेसा के निस्वार्थ सेवा और करुणा के जीवन मूल्यों को याद करते हुए समाज के जरूरतमंद बच्चों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाने का संकल्प लेना था।

शास्त्री नगर स्थित संकल्प स्कूल में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की प्राचार्या डॉ. दीप्ति तिवारी के स्वागत भाषण के साथ हुई, जिन्होंने IAP के इस सराहनीय प्रयास की तारीफ की।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशीष विश्वास, डॉ. रोली मोहन और डॉ. अमितेश यादव ने किया। इस दौरान लगभग 60 बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में से एक योग सत्र रहा, जिसका संचालन सुश्री दिव्यांगिनी पांडे और श्री प्रखर गुप्ता ने किया। इस सत्र में बच्चों को प्राणायाम, श्वसन क्रियाएँ और विभिन्न सरल योगासन सिखाए गए ताकि वे स्वस्थ और अनुशासित जीवन शैली अपना सकें।

इसके पश्चात, डॉ. रोली मोहन ने बच्चों और उनके अभिभावकों को स्वास्थ्य संबंधी जरूरी जानकारियाँ और टिप्स दिए, जिससे सभी को एक बेहतर और सेहतमंद जीवन जीने के तरीकों के बारे में जानकारी मिली।

कार्यक्रम में बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों और नृत्य ने माहौल को और भी रोमांचक बना दिया। उनकी मनमोहक प्रस्तुतियों ने सभी उपस्थित लोगों का दिल जीत लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अनुराग भारती ने अपने संबोधन में कहा, “सेवा, सहयोग और संवेदनशीलता ही वास्तविक चिकित्सा का आधार है। IAP का यह प्रयास इसी भावना को आगे बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक कदम है।”

अंत में, AOP कानपुर के सचिव ने सभी अतिथियों, volunteers और participants का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि IAP का उद्देश्य केवल अस्पतालों तक सीमित न रहकर सीधे समाज तक पहुँचना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “IAP चैरिटी डे केवल एक आयोजन नहीं बल्कि हर बच्चे को एक स्वस्थ कल प्रदान करने का हमारा सामूहिक संकल्प है।”

यह कार्यक्रम मदर टेरेसा की जयंती के अवसर पर पूरे देश में आयोजित किए जा रहे IAP चैरिटी डे समारोहों का एक हिस्सा था, जिसका लक्ष्य बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में निस्वार्थ सेवा के प्रति जागरूकता फैलाना है।