इस अवसर पर हिंदी में अनुवादित क़ुरान का विमोचन भी हुआ। इस अनुवाद को मौलाना शाहिद हुसैन मैसम नोनहरवी ने किया है और इसे इमामिया यूथ ऑर्गनाइज़ेशन ने प्रकाशित किया है।

कानपुर ( मोहम्मद उस्मान कुरैशी) शिया उलेमा बोर्ड कानपुर के तहत जश्ने ए अहले बैत का आयोजन सावित्री नगर रामादेवी केंद्र, इमाम ज़ैनुल आबिदीन में किया गया। इस कार्यक्रम का संचालन मीडिया इंचार्ज मौलाना शाहिद इमाम बाकरी ने किया।

कार्यक्रम की शुरुआत मौलाना अज़हर अब्बास नक़वी की क़ुरान की तिलावत से हुई। इसके बाद ज़िया ज़ैदी ने हालात-ए-हाज़िरा पर एक नज़्म पेश की। फ़िरोज़ हैदर फ़ातिर इस्फ़हानी ने अपने खूबसूरत शेर सुनाए।

इस मौके पर मौलाना ज़ीशान हैदर ने कहा कि कर्बला की जंग दो मक़सदों के बीच थी। एक तरफ़ इमाम हुसैन इस्लाम को बचाने के लिए खड़े थे और दूसरी तरफ़ यज़ीद इस्लाम को मिटाना चाहता था। आज इस्लाम ज़िंदा है, इसलिए असली जीत इमाम हुसैन की हुई।

शिया उलेमा बोर्ड के सचिव मौलाना अलमदार हुसैन ने सभी लोगों का धन्यवाद किया और बोर्ड के उद्देश्यों को बताया:

  • तलाक़ के मामलों को कम करना।
  • समाज की समस्याओं का समाधान निकालना।
  • आपसी मतभेद दूर करना।
  • धार्मिक मामलों को उलेमा के सुपुर्द करना।
  • ज़रूरतमंदों की पहचान कर उनकी मदद करना।
  • हर उम्र के लोगों के लिए धार्मिक कक्षाएँ चलाना।

बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना नसीम अब्बास हसनी ने उलेमा की ज़िम्मेदारियों पर रौशनी डाली। उन्होंने कहा कि हर आलिम को अपनी पहचान बनानी चाहिए, ताकि लोग उन्हें पहचान सकें। उन्होंने बोर्ड के प्रति निम्नलिखित बातों को लेकर ध्यान देने को कहा:

  • सभी धार्मिक संस्थाएँ और लोग इस बोर्ड के ज़रिए एक साथ काम करेंगे।
  • ज़ाकिरीन का जनता से क़रीबी रिश्ता है, इसलिए बोर्ड उनसे मज़बूत संबंध बनाएगा।
  • धार्मिक पुस्तकों के अध्ययन के लिए प्रतियोगिताएँ होंगी।
  • मस्जिदें सिर्फ़ नमाज़ के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा, चिकित्सा और शादी जैसे कार्यों के लिए भी उपयोग होंगी।
  • बोर्ड हर किसी की शिक्षा, रोज़गार और आर्थिक स्थिति की जानकारी रखेगा।

कार्यक्रम के अंत में कोषाध्यक्ष मौलाना हामिद हुसैन ने कहा कि डॉ. क़ल्बे सादिक़ का कहना था, “अगर लोग आप पर पत्थर फेंक रहे हैं, तो समझ लें कि आप सही रास्ते पर हैं।”

जश्ने ए अहले बैत इस अवसर पर हिंदी में अनुवादित क़ुरान का विमोचन भी हुआ। इस अनुवाद को मौलाना शाहिद हुसैन मैसम नोनहरवी ने किया है और इसे इमामिया यूथ ऑर्गनाइज़ेशन ने प्रकाशित किया है।

प्रोग्राम में शामिल उलेमा:

  • मौलाना फ़ाज़िल हुसैन (सहायक कोषाध्यक्ष)
  • मौलाना क़ंबर हुसैन (सदस्य)
  • मौलाना मोहम्मद हैदर (सदस्य)
  • मौलाना फ़िरोज़ हैदर (सदस्य)

अंत में, मौलाना अज़हर अब्बास नक़वी की दुआ पर प्रोग्राम का समापन हुआ।

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