कमर गनी उस्मानीकमर गनी उस्मानी जिसको मुस्लिमों ने अकेला छोड़ दिया

मौलाना कमर गनी उस्मानी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखा पत्र

ATS पर लगाये गंभीर आरोप, पिछले 3 वषों से जेल में हैं बंद

तहरीक फरूग ए इस्लाम के संस्थापक मौलाना कमर गनी उस्मानी ने भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिख कर न्याय की गोहार लगाई है. कमर गनी उस्मानी लगभग पिछले 3 वर्षों से जेल में हैं. उन्होंने साबरमती जेल से ख़त लिखकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से विवादित कुख्यात पुजारी यति नरसिंहानंद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

ज्ञात रहे कि यति नरसिंहानंद बहुसंख्यक समाज का एक कुख्यात पुजारी है. जो मुस्लिमों और इस्लाम पर अभद्र टिपण्णी करता रहता है. कमर गनी की मांग है कि यति नरसिंहानंद समेत वसीम त्यागी पिंकी चौधरी टी राजा तथा नूपुर शर्मा जैसे आतंकवादियों के विरुद्ध विधेयक कार्रवाई कि जाये.

कमर गनी उस्मानी की गरफ्तारी

मौलना कमर गनी उस्मानी को गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने जनवरी 2022 में गिरफ्तार किया था. यह गिरफ्तारी 30 वर्षीय किशन भारवाड़ की हत्या के सिलसिले में की गई थी. एटीएस ने आरोप लगाया कि भारवाड़ की हत्या सोशल मीडिया पर मुस्लिम विरोधी टिप्पणी के कारण की गई क्योंकि दिल्ली स्थित उस्मानी ने कुछ बयान जारी किए थे. जिससे कथित तौर पर हत्या को बढ़ावा मिलता है.

भूख हड़ताल

बुधवार को राष्ट्रपति को लिखे अपने पत्र में उस्मानी ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद और अल्लाह के बारे में नरसिंहानंद द्वारा की गई नफरत भरे भाषणों और ईशनिंदा वाली टिप्पणियों के बारे में जानने पर उन्हें दिल का दौरा पड़ा। उन्होंने लिखा, “जब तक उन्हें सलाखों के पीछे नहीं डाला जाता और यूएपीए एवं एनएसए के तहत उन पर मामला दर्ज नहीं किया जाता. मैं अपनी भूख हड़ताल जारी रखूंगा. भूकहड़ताल के दौरान कोई चिकित्सा उपचार भी नहीं लूंगा.

कार्रवाई की मांग

उस्मानी ने हिंदुत्व नेता पिंकी चौधरी, टी राजा और नूपुर शर्मा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है. उन्होंने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वालों को “आतंकवादी” कहा. उन्होंने कहा कि टी राजा और नूपुर शर्मा की टिप्पणियों ने पूरे देश में विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया.

प्रधान मंत्री मोदी पे निशाना

कमर गनी उस्मानी ने कहा कि “एक तरफ प्रधानमंत्री इस्लामिक देशों से पुरस्कार ले रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ भारतीय मुसलमानों को सताया जा रहा है। उन्होंने अपने पत्र में दर्शाया कि इन आतंकवादियों पर दर्जनों एफआईआर दर्ज हैं। उच्च न्यायालय ने भी इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं। लेकिन फिर भी इन लोगों को गिरफ्तार नहीं किया गया जाता। ” उस्मानी के अनुसार, अगर इन लोगों को उनकी टिप्पणियों के लिए गिरफ्तार भी किया जाता है, तो पुलिस उन पर मामूली आरोप लगाकर तुरंत रिहा कर देती है।

झूठे मामलों में फंसाया गया

उस्मानी ने कहा कि जो लोग यति नरसिंहानंद खिलाफ आवाज उठाने का साहस करते हैं उनको को झूठे मामलों में फंसा दिया जाता है या उनके घरों को बुलडोजर से गिरा दिया जाता है। उनका कहना है कि नरसिंहानंद, पिंकी चौधरी जैसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करने और आवाज उठाने पर उनके संगठन के लोगों को झूठे मामलों में नामजद किया गया है।

भेदभाव का आरोप

उस्मानी ने पिछले तीन सालों से जेल में अपने साथ हो रहे भेदभाव और अन्याय के बारे में भी लिखा है। उन्होंने कहा, “एटीएस के दबाव में जेल प्रशासन अन्याय कर रहा है. इसकी जानकारी उनहोंने ट्रायल कोर्ट को दिनांक 5-10-2024, 13-12-2024 और 27-12-2024 को दी है. “उस्मानी ने कहा कि उनके दोनों पैरों में दिक्कत है और वे चलने में असमर्थ हैं. उन्हें कई बार सिविल अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहां उन्हें उचित उपचार नहीं मिला.

फर्जी रिपोर्ट से रोकी जा रही जमानत

कमर गनी ने बताया कि उनकी मेडिकल रिपोर्ट फर्जी है. जिसके कारण उन्हें उपचार के लिए पैरोल नहीं मिल पा रही है. पिछले 116 दिनों से मुझे एकांत कारावास में रखा गया. 20 जनवरी को मुझे हल्का हार्ट अटैक आने पर बाहर लाया गया।

जेल प्रशासन बेसिक ज़रूरत पूरी नहीं करता

उन्होंने अपने पत्लिर में लिखा कि “मुझे नमाज़ पढ़ने के लिए कुर्सी भी नहीं मिली. मजबूरी में टूटी हुई शौचालय की कुर्सी पर नमाज़ पढ़ना पड़ रहा है.

निष्कर्ष:

फिल्हाल मौलाना कमर गनी उस्मानी के साथ जो कुछ हो रहा है. वह कोई नया नहीं है. भारत में ऐसी बहुत सारी घटनाएँ हैं जहाँ एक विशेष समुदाय के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगा कर उन्हें जेलों में बंद रखा जाता है. सरकार और भारत की न्याय व्यवस्था के लिए जहाँ यह गभीर चिंता का विषय है वहीँ समाज सेवी संथाओं एवं धार्मिक स्वतंत्रता के पक्षधर हर भारतीय के लिए यह शर्म की बात है

विशेष रूप से मुस्लिम समाज को इस पर गहन समीक्षा करने की जरूरत है अन्यथा मुस्लिम हितों की रक्षा कर पाना अति मुश्किल हो जायेगा न्याय और सामान अधिकारों के लिए मुस्लिम समुदाय राजीनीतिक सुधारों पर विचार करना चाहिए .

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