मुहकमा -ए-शरीया व दारुल-क़ज़ा, कानपुर के तत्वावधान में तैयारियाँ ज़ोरों पर
कानपुर।मोहम्मद उस्मान कुरैशी। मुहकमा -ए-शरीया व दारुल-क़ज़ा, कानपुर के तत्वावधान में ईमारत-ए-शरीया उत्तर प्रदेश का दो दिवसीय तर्बीती कैंप 25 और 26 जून को जामिआ महमूदिया अशरफ़ुल उलूम, जाजमऊ, कानपुर में आयोजित किया जाएगा। यह कैंप पूर्व में 7-8 मई को होना तय था, लेकिन देश की परिस्थितियों के चलते स्थगित कर दिया गया था। अब उसी कैंप को नई तारीखों पर पुनः आयोजित किया जा रहा है।
इस अहम कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए बीती रात जमीअत बिल्डिंग, रजब़ी रोड में मुहकमा -ए-शरीया व दारुल-क़ज़ा, कानपुर के सक्रिय कार्यकर्ताओं और ज़िम्मेदारों की एक विशेष मीटिंग आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता मुफ्ती अब्दुर्रशीद क़ासमी ने की।
मीटिंग को संबोधित करते हुए जनरल सेक्रेटरी मौलाना अमीनुल हक़ अब्दुल्लाह क़ासमी ने कैंप के उद्देश्यों, और उसकी इल्मी, शरई व समाजी अहमियत पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस तर्बीती कैंप में पूर्वी उत्तर प्रदेश के विभिन्न ज़िलों से मुहकमा ए शरीया ज़िम्मेदार, जमीअत उलेमा के ज़िला सदर व महासचिव समेत 150 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है।
कैंप की सदारत अमीर-ए-शरीअत उत्तर प्रदेश हज़रत मौलाना सैयद अशहद रशीदी (मुरादाबाद) करेंगे, जबकि मेहमान-ए-ख़ुसूसी के तौर पर नायब अमीरुल हिन्द मौलाना मुफ्ती सैयद मोहम्मद सलमान मंसूरपूरी (उस्ताज़-ए-हदीस, दारुल उलूम देवबंद) की शिरकत तय है। इसके अलावा मुफ्ती सैयद मोहम्मद अफ़्फ़ान मंसूरपूरी और मुफ्ती अशफ़ाक़ आज़मी की भी उपस्थिति रहेगी।
मौलाना अमीनुल हक़ अब्दुल्लाह ने कहा कि यह महज़ एक जानकारी देने वाला कार्यक्रम नहीं, बल्कि मौजूदा ज़माने की ज़रूरतों के मुताबिक क़ज़ा व इफ्ता के निज़ाम को मज़बूत, प्रभावी और व्यावहारिक बनाने की एक संगठित कोशिश है।
अध्यक्षता कर रहे मुफ्ती अब्दुर्रशीद क़ासमी साहब ने कहा कि यह कैंप नई नस्ल को फ़िक्री और अमली तर्बियत देने का एक अहम साधन है। इसलिए इसमें हिस्सा लेने वाला हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी को इबादत और ख़िदमत-ए-दीन समझते हुए अदा करे।
उन्होंने यह भी कहा कि अमीरूल हिन्द मौलाना सैयद अरशद मदनी और जमीअत उलेमा-ए-हिन्द के सदर मौलाना सैयद महमूद मदनी की सरपरस्ती और निगरानी में यह कैंप शरीअत के क़ानूनी निज़ाम को नए ज़माने के अनुरूप ढालने का एक अहम ज़रिया साबित होगा, साथ ही इससे नौजवान उलमा की सलाहियतों को तराशने और बढ़ाने का भी सुनहरा अवसर मिलेगा।
