कानपुर: (मोहम्मद उस्मान कुरैशी) काशीराम कालोनी में आल इंडिया ग़रीब नवाज़ कौन्सिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत (मौलना) मो. हाशिम अशरफ़ी इमाम ईदगाह गद्दियाना ने जश्ने मौला अली से खिताब करते हुए कहा कि हजरते मौला अली शेरे खुदा 13 रजब मुताबिक 15 सितम्बर सं 601 ई. मक्का में पैदा हुए

आप पैगम्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के दामाद होने के साथ साथ इस्लाम के चौथे खलीफ़ा भी थे आप हज़रत सय्यदना इमामे हसन और इमामे हुसैन रजी अल्लाहु अन्हुमा के पिता भी हैं

आप का निकाह पैगम्बरे इस्लाम की बेटी हज़रते बीबी फ़ातिमा से हुआ आप हुज़ूर कि निगरानी में पले और बढ़े| आपके अन्दर ईमानदारी इंसाफ बहादुरी जैसी तमाम खूबियां मौजूद थीं| पैगम्बरे इस्लाम आप से बहुत मोहब्बत करते थे| आप की कही कुछ बातें काफी मशहूर है

  1. सब्र एक ऐसी सवारी है जो अपने सवार को गिरने नहीं देती न किसी के क़दमों में न किसी की नज़रों से
  2. जीवन के हर मोड़ पर समझौता करना सीखो,
  3. झुकता वही है जिसमें जान होती है अकड़ना तो मुर्दे की पहचान होती है
  4. इल्म दौलत से बेहतर है, इल्म तेरी हिफाज़त करता है और तू दौलत की,
  5. दौलत खर्च करने से घटती है और इल्म खर्च करने से बढ़ता है,
  6. अच्छा स्वभाव एक बेहतरीन साथी है,
  7. नैतिकता बेहतरीन विरासत है,
  8. ज़ुबान का वज़न बहुत ही हल्का होता है मगर बहुत कम लोग ही संभाल पाते हैं

पैगम्बरे इस्लाम ने फ़रमाया अली मुझ से हैं मैं अली से हूँ जिस का मै आका हूँ अली उस के आका हैं | उन्हों ने कहा हजरत अली बहुत बड़े इल्म वाले थे| पैगम्बरे इस्लाम ने फ़रमाया मैं इल्म का शहर हूँ और अली उस के दरवाज़ा हैं | आप के फैसले और फतवे बहुत ही अनमोल और अनोखे होते थे|

जिसको पढ़ने के बाद बड़े बड़े इल्म वाले आश्चर्य चकित हो जाते थे | आप की ज़ुबान से ऐसे ऐसे अनमोल बोल निकले हैं जिनको सोने के पानी से लिखने के लायक हैं | उन्हों ने बताया की मौला अली का जीवन मर्दों के लिए और हजरत फातिमा का जीवन औरतों के लिए रोल माडल है

मौलना महमूद हस्सान अख्तर अलीमी ने विचार व्यक्त किये वाज़ेह हो कि अंजुमन आशिक़े रसूल कमेटी के ताजुद्दीन ,सईद शेखू,समी अहमद, अल्तमस, अब्दुल्लाह खान, गुड्डू, तानिस,अमान, तन्ना, शहनवाज़, फरदीन, अफ़्फ़ान अंसारी,तय्यब अंसारी ने घंटों खड़े हो कर लोगों को लंगर खिलाया इस से पूर्व जलसे का आरंभ कुरान ए पाक से हाफिज मिनहाजुद्दीन क़ादरी ने किया संचालन हाफिज मो.अरशद अली अशरफ़ी ने किया हदया ए नात व मन्क़बत यूसुफ रज़ा कानपुरी, हाफिज नियाज अशरफी,मो.हसन शिबली अशरफी ने पेश किये सलातो सलाम एवं मुल्क और आलम ए इस्लाम कि तरक्की व खुशहाली, अमनो अमान के लिए दुआएं कि गयीं तबर्रुक बिठा कर खिलाया गया इस अवसर पर भारी तादाद में लोग उपस्थित थे

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