कानपुर। मोहम्मद उस्मान कुरैशी। जामिआ अशरफुल मदारीस गद्दियाना में ग्यारहवीं शरीफ़ के मुबारक मौके पर गाज़ी ए इस्लाम हज़रत अल्लामा मौलाना मोहम्मद हाशिम अशरफी इमाम ईदगाह गद्दियाना की सरपरस्ती में निहायत ही अकीदत व एहतराम के साथ क़ुरआन ख़्वानी और जश्न-ए-ताजदारे-बग़दाद की महफ़िल का आयोजन किया गया जिसमें उलमा-ए-किराम, नातख़्वां हज़रात और लोगों ने क़सीर तादाद में शिरकत की महफ़िल का आग़ाज़ तिलावत-ए-क़ुरआन-ए-करीम से हुआ जिसकी सआदत क़ारी मोहम्मद अहमद अशरफ़ी ने हासिल की।
निज़ामत के फ़राइज़ हाफ़िज़ मोहम्मद अरशद अशरफ़ी ने ब-हुस्नो खूबी अंजाम दिए। उसके बाद बारगाह-ए-रिसालत में हदिया-ए-नात पेश करने का सिलसिला शुरू हुआ। नातख़्वां हज़रात ने नात व मनकबत पेश किए आशिक़ान-ए-रसूल या रसूल अल्लाह और या ग़ौस-ए-आज़म के नारे लगाते रहे और फ़ज़ा ज़िक्र-ए-मुस्तफ़ा से गूंजती रही मौलाना फतेह मोहम्मद क़ादरी ने अपने ख़िताब में हुज़ूर ग़ौस-ए-आज़म सैयदना शैख़ अब्दुल क़ादिर जिलानी रहमतुल्लाह अलैह की विलादत-ए-ब सआदत, हयात-ए-तय्यिबा और ख़िदमात-ए-जलीला पर तफ़्सील से रोशनी डाली। क़ारी सैयद क़ासिम बरकाती ने कहा कि हुज़ूर ग़ौस पाक ने अपने वक़्त में दीन-ए-इस्लाम के तहफ़्फ़ुज़ और इशाअत के लिए जो नुमायां काम अंजाम दिए वो रहती दुनिया तक याद रखे जाएंगे आपकी तालीमात से हमें इत्तेहाद, अख़्वत, दीन पर साबितक़दमी और दुनिया व आख़िरत की भलाई का सबक़ मिलता है।
महफ़िल में हाज़िरीन ने बा-अदब खड़े होकर बारगाह-ए-रिसालत में दरूद व सलाम के नज़राने पेश किए। इस रूह परवर मंज़र ने सामेईन के दिलों को मुनव्वर कर दिया और हर एक पर एक ख़ास रूहानी कैफ़ियत तारी रही इख़्तितामी दुआ में उम्मत-ए-मुसलिमा की सलामती, मुल्क व मिल्लत की तरक़्क़ी और अम्न व सकून की दुआएं मांगी गईं।
दुआ के बाद फ़ातेहा-ख़्वानी की गई और लंगर-ए-ग़ौसिया तक़सीम किया गया
इस मौके पर ख़ास तौर पर मौलाना महमूद हसन अख़्तर अलीमी, मौलाना आज़ाद ख़ान अशरफ़ी, मौलाना मोहम्मद कलीम क़ादरी, मौलाना सुुफ़यान अहमद मिस्बाही, मौलाना मसऊद मिस्बाही, मौलाना ग़ुल मोहम्मद जामई, मौलाना मुअज़्ज़म जामई, हाफ़िज़ मसऊद रज़ा अशरफ़ी, चांद क़ादरी, हाफ़िज़ हशमतुल्लाह, महताब आलम उर्फ़ गद्दू, रमज़ान अली आदि मौजूद रहे